प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज आधुनिक युग के प्रमुख राधावल्लभीय संत हैं जिन्होंने भक्ति मार्ग को सरलता से जनसामान्य तक पहुँचाया। इनकी आध्यात्मिक यात्रा त्याग, गुरुभक्ति और दिव्य प्रेम का अद्भुत संगम है। बचपन से ही आध्यात्मिक प्रश्नों ने इन्हें सांसारिक मोह से विमुख कर वृंदावन की ओर प्रेरित किया।
प्रमुख जीवन घटनाओं की समयरेखा (Timeline Table)
वर्ष | घटना/उपलब्धि | विवरण |
---|---|---|
1969 | जन्म | उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में जन्म (बचपन का नाम: अनिरुद्ध कुमार पांडेय) |
1982 | घर त्याग | 13 वर्ष की आयु में आध्यात्मिक खोज में वाराणसी पहुँचे |
1982-1990 | तपस्या काल | गंगा तट पर कठोर साधना, आकाशवृत्ति का पालन |
1990 | वृंदावन आगमन | रासलीला के दिव्य आह्वान पर ब्रज भूमि में प्रवेश |
1994 | दीक्षा | श्री हित मोहितमारल गोस्वामी जी से शरणागत मंत्र दीक्षा |
1995 | गुरु मिलन | श्री हित गौरंगी शरण जी महाराज को सद्गुरु स्वीकारा |
1995-2005 | गुरु सेवा | 10 वर्ष तक निरंतर मधुकरी करते हुए सेवा |
2010 | स्वास्थ्य संकट | दोनों गुर्दे खराब होने का निदान |
2016 | ट्रस्ट स्थापना | श्री हित राधा केली कुंज ट्रस्ट की स्थापना |
2019-वर्तमान | प्रचार कार्य | “एकांतिक वार्तालाप” यूट्यूब श्रृंखला व पुस्तक प्रकाशन |
प्रमुख शिक्षाएँ एवं दार्शनिक सिद्धांत (SEO Keywords: Premanand Maharaj Teachings)
-
गुरु महिमा
“गुरु के बिना भक्ति पथ अधूरा है – वे अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाते हैं।” -
ब्रह्मचर्य का महत्व
“यह शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक शक्ति का मूल आधार है।” -
चरित्र निर्माण
“चरित्रवान व्यक्ति ही समाज को सकारात्मक दिशा दे सकता है।” -
भाव की शुद्धता
“कर्म से नहीं, भाव से भगवान प्रसन्न होते हैं।”
सामाजिक योगदान एवं प्रभाव (Premanand Maharaj Social Work)
क्षेत्र | योगदान | प्रभाव |
---|---|---|
धार्मिक | राधावल्लभ परंपरा का प्रचार | 500+ यूट्यूब एपिसोड्स के माध्यम से करोड़ों तक पहुँच |
चिकित्सा | आश्रम में डायलिसिस सेंटर | 17+ वर्षों से निःशुल्क उपचार सुविधा |
शैक्षणिक | आध्यात्मिक पुस्तकें | “ब्रह्मचर्य”, “स्पिरिचुअल अवेकनिंग” जैसी प्रेरणादायक कृतियाँ |
सेवा कार्य | तीर्थयात्री आवास | वृंदावन में निःशुल्क भोजन, आवास व चिकित्सा सुविधा |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q: प्रेमानंद महाराज का जन्म स्थान कहाँ है?
A: उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले के आखरी गाँव में।
Q: इनके प्रमुख गुरु कौन थे?
A: श्री हित गौरंगी शरण जी महाराज (ब्रज के प्रसिद्ध रासिक संत)।
Q: इनकी प्रसिद्ध पुस्तकें कौन-सी हैं?
A: “ब्रह्मचर्य: जीवन का आधार स्तंभ” (2019), “हित सद्गुरुदेव के वचनामृत” (2020)।
Q: स्वास्थ्य संकट के बावजूद कैसे सक्रिय हैं?
A: 2008 से डायलिसिस पर हैं, किंतु आश्रम में ही चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होने से नियमित सत्संग करते हैं।
“वृंदावन वह धाम है जहाँ प्रत्येक कण में राधा-कृष्ण का प्रेम विद्यमान है। इस प्रेम को पाने के लिए भाव की शुद्धता ही एकमात्र माध्यम है।”
— प्रेमानंद गोविंद शरण जी महाराज